जागरण संवाददाता, महोबा : श्रीनगर थाना क्षेत्र के ग्राम ननौरा में बस स्टैंड पर वाहन का इंतजार कर रहे गल्ला व्यापारी पर दो बदमाशों ने लाठियों से हमलाकर रुपये भरा झोला लूट लिया। व्यापारी के मुताबिक झोले में तीन लाख 12 हजार रुपये रखे थे। लाठियों के हमले से व्यापारी गंभीर रूप से घायल हो गया। हमलावरों के भाग जाने पर व्यापारी ने घरवालों को सूचना दी। घरवालों ने उसे जिला अस्पताल में भर्ती कराया है। ग्राम ननौरा निवासी 40 वर्षीय अरविद गुप्ता गल्ला व्यापारी हैं। शुक्रवार को वह महोबा की नवीन गल्ला मंडी आने के लिए ननौरा स्टैंड पर खड़े थे। व्यापारी के भाई भूपेंद्र ने बताया कि अरविद गल्ला खरीदने के लिए करीब तीन लाख 12 हजार रुपये लेकर घर से निकले थे। वह महोबा आने के लिए वाहन का इंतजार कर रहे थे कि तभी पैदल दो लोग वहां आए और अचानक पीछे से लाठी सिर पर मार दी। वह कुछ समझ पाते, इतने में दूसरे युवक ने उनपर लाठियां बरसानी शुरू कर दीं। वह बचाव में जमीन पर गिर गए। इतने में मौका देख कर हमलावर उनसे झोला छीन कर भाग गए। स्टैंड पर कुछ दूर खड़े लोग तमाशा देख रहे थे लेकन कोई बचाव के लिए नहीं आया। बदमाशों के भाग जाने के बाद वह लोग आए। जिला अस्पताल आए अरविद के भाई बाबूलाल ने बताया कि दो लोगों ने प्राणघातक हमला कर 3.12 लाख रुपये लूट कर ले गए। श्रीनगर थाना प्रभारी संजय शर्मा ने बताया कि व्यापारी के साथ हुई घटना की जांच की जा रही है। घायल को इलाज के लिए जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया है। श्रीनगर थाना प्रभारी संजय शर्मा ने बताया पीड़ित के गंभीर चोट होने के कारण उसे इलाज के लिए भेजा गया था। देर शाम अज्ञात हमलावरों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया गया है, साथ ही उनकी तलाश में छापेमारी के लिए टीम लगा दी गई है।
सुशांत खरे, महोबा : कोरोना संक्रमण की चपेट में प्रतिदिन लोग आ रहे हैं। वैसे पॉजिटिव मरीजों का आंकड़ा घट भी रहा है। अस्पताल में भर्ती मरीजों के साथ होम क्वारंटाइन मरीजों के भी स्वस्थ होने की तादात में वृद्धि देखी गई है। होम क्वारंटाइन मरीजों को मेडिकल किट के साथ टीम समय पर चेकअप कर रही हैं। कंट्रोल रूम से भी दिन में एक बार फोन कर हालचाल लिया जा रहा। वर्तमान में कोरोना संक्रमितों की संख्या 600 के करीब है। 300 होम क्वारंटाइन मरीज हैं। होम क्वारंटाइन मरीजों की मदद के लिए स्वास्थ्य विभाग की ओर से कम्युनिटी हॉल में दवाओं की किट तैयार की जा रही है। रोजाना दो हजार दवाओं के पैकेट बन रहे हैं। फार्मासिस्ट मनीष गुप्ता ने बताया कि शिक्षकों एवं अन्य कर्मचारियों को इस काम में लगाया गया है। यह पैकेट सीएचसी, पीएचसी, विभिन्न विभागों में पहुंचा कर बाद में वहां से होम क्वारंटाइन मरीजों को भेजे जाते हैं। पूरे जिले में स्वास्थ्य विभाग की ओर से 33 टीमों का गठन किया गया है। उनके फोन नंबर भी सार्वजनिक करके लोगों को सूचना दी गई है। मरीज जरूरत के अनुसार उन्हें फोन करके मदद ले सकते हैं। किट में यह दवाएं मौजूद दवा किट में आइवरमैक्ट्रिन, एजथ्रोमाइसिन, विटामिन बी, जिक सल्फेट, पैरासीटामॉल, विटामिन डी, विटामिन सी, डॉक्सीसाइक्लिन दवा हैं। शुरुआती दौर में ये दवा लेने से मरीज को तीन दिन में आराम मिल जाता है। विभिन्न कर्मचारियों और ग्रामीण क्षेत्रों में आशाओं को लगाकर दवा किट का वितरण कराया जा रहा है।
अजय दीक्षित, महोबा : इस समय कफन के धागों में दर्द नहीं सिर्फ फायदा तलाशा जा रहा है। आपदा में भी लाभ का अवसर तलाश रहे लोगों की सूची लंबी है। अस्पताल से लेकर मेडिकल स्टोर तो अभी तक शामिल ही थे अब अंतिम संस्कार करना भी महंगा हो चला है। वर्तमान हालातों को देख यह कह सकते हैं कि इंसान की जान सस्ती और कफन महंगा हो गया है। जिले में कोरोना से मरने वालों की संख्या तो एक साल में 55 ही है लेकिन अप्रैल से मई माह तक जिले में मौत के बनने वाले प्रमाण पत्र पर गौर करें तो यह संख्या पांच सौ के करीब पहुंच चुकी है। इसमें सामान्य बीमार, अन्य हादसों से हुई मौत भी जुड़ी हैं। इस दौरान अंतिम संस्कार के लिए लोग सामग्री लेने को भटकते रहे, कारण कि दुकानों में ताला है। दुकान के बाहर लिखे नंबर पर डायल करते ग्राहक दुकानदार से संपर्क करते हैं। इसमें मोल भाव की कोई गुंजाइश नहीं होती, जो कफन पहले दो सौ का था अब तीन सौ से चार सौ रुपये तक वसूले जा रहे हैं। अन्य सामग्री में भी डबल दाम लिए जा रहे हैं। कफन जो अमीर हो या गरीब सभी के लिए सामान होता है, वह तीस-चालीस रुपये मीटर के स्थान पर पचास रुपये से साठ रुपये मीटर में मिल रहा है। मजबूरी हो तो दाम बढ़ भी जाते हैं।